सितंबर, 1994 में घोषित औषधि नीति, 1986 में संशोधन के अनुसार, औषधि नीति के मुख्य उद्देश्य निम्नानुसार हैं:
- अच्छी गुणवत्ता की आवश्यक और जीवन रक्षक और रोगनिरोधी दवाओं की उचित कीमतों पर प्रचुर मात्रा में उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- दवा उत्पादन पर गुणवत्ता नियंत्रण की प्रणाली को मजबूत करना और देश में दवाओं के तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देना;
- आर्थिक आकार के साथ लागत प्रभावी उत्पादन को प्रोत्साहित करने और नई तकनीकों और नई दवाओं को पेश करने की दृष्टि से फार्मास्युटिकल उद्योग में नए निवेश को चैनलाइज़ करने के लिए अनुकूल वातावरण बनाना;
- और दवाओं के उत्पादन के लिए स्वदेशी क्षमता को मजबूत करना।ffffffffffff
ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर, 1995 भारत सरकार द्वारा सेक के तहत जारी किया गया एक आदेश है। दवाओं की कीमतों को विनियमित करने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के 3। आदेश अन्य बातों के साथ-साथ मूल्य नियंत्रित दवाओं की सूची, दवाओं की कीमतों के निर्धारण की प्रक्रिया, सरकार द्वारा निर्धारित कीमतों के कार्यान्वयन की विधि, प्रावधानों के उल्लंघन के लिए दंड आदि प्रदान करता है। डीपीसीओ के प्रावधानों को लागू करने के उद्देश्य से सरकार की शक्तियां। एनपीपीए में निहित किया गया है।
समाज के स्वास्थ्य के लिए नशा जरूरी है। दवाओं को आवश्यक घोषित किया गया है और तदनुसार आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत रखा गया है।
नहीं, आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली लगभग 500 बल्क दवाओं में से केवल 74 को वैधानिक मूल्य नियंत्रण के तहत रखा जाता है। इन बल्क दवाओं वाले सभी फॉर्मूलेशन या तो एकल या संयोजन रूप में मूल्य नियंत्रित श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। हालांकि, अन्य दवाओं की कीमतों को विनियमित किया जा सकता है, अगर जनहित में वारंट किया गया हो।
नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA), 29 अगस्त 1997 को कैबिनेट कमेटी द्वारा सितंबर 1994 में ड्रग पॉलिसी की समीक्षा करते हुए लिए गए निर्णय के अनुसार विशेषज्ञों के एक स्वतंत्र निकाय के रूप में स्थापित की गई थी। प्राधिकरण को अन्य बातों के साथ-साथ फार्मास्युटिकल उत्पादों (बल्क ड्रग्स और फॉर्मूलेशन) की कीमतों के निर्धारण/संशोधन, ड्रग्स (कीमत नियंत्रण) आदेश के प्रावधानों को लागू करने और देश में नियंत्रित और नियंत्रणमुक्त दवाओं की कीमतों की निगरानी का काम सौंपा गया है। देश।
डीपीसीओ के प्रावधानों के अनुसार, एनपीपीए दो प्रकार की कीमतें तय करती है। नियंत्रित श्रेणी में दवाओं के लिए उच्चतम मूल्य और गैर-सीमित मूल्य।
प्रत्येक थोक दवा के मामले में, जो मूल्य नियंत्रण के अधीन है, एक एकल अधिकतम विक्रय मूल्य निर्धारित किया जाता है जो पूरे देश में लागू होता है।
डीपीसीओ, 1995 के पैरा 8(1), (2) और (4) और पैरा 11 के तहत एनपीपीए द्वारा निर्धारित गैर-सीमित मूल्य किसी विशेष कंपनी के निर्धारित फॉर्मूलेशन के विशेष पैक आकार के लिए विशिष्ट हैं। इसलिए वे सूत्रीकरण विशिष्ट और कंपनी विशिष्ट हैं। गैर-सीलिंग पैक के लिए निर्धारित मूल्य कार्यालय आदेश जारी कर संबंधित फर्मों को सूचित किए जाते हैं। ऐसे क्रम में आमतौर पर एक्साइज ड्यूटी एलिमेंट को अलग से दिखाया जाता है। हालांकि, गैर-सीमित मूल्य में स्थानीय कर शामिल नहीं हैं।
गैर-अनुसूचित दवाओं के निर्माता (दवाएं सीधे मूल्य नियंत्रण के तहत नहीं हैं) को ऐसी दवाओं के लिए एनपीपीए से मूल्य अनुमोदन लेने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, एनपीपीए को ऐसी दवाओं की कीमतों की निगरानी करने और आवश्यक होने पर सुधारात्मक उपाय करने की आवश्यकता होती है और इसमें ऐसी कीमतों को तय करने और विनियमित करने की शक्ति शामिल होती है।
डीपीसीओ, 1995 के पैरा 19 के अनुसार अनुसूचित (नियंत्रित) दवाओं के लिए मार्जिन 16% तय किया गया है, जिसे नीचे पुन: प्रस्तुत किया गया है:
- "एक निर्माता, वितरक या थोक व्यापारी खुदरा विक्रेता को एक फॉर्मूलेशन बेचेगा, जब तक कि इस आदेश के प्रावधानों या उसके तहत किए गए किसी भी आदेश के प्रावधानों के तहत अनुमति नहीं दी जाती है, खुदरा मूल्य के बराबर कीमत पर, जैसा कि एक आदेश द्वारा निर्दिष्ट किया गया है या सरकार द्वारा अधिसूचित किया गया है। (उत्पाद शुल्क को छोड़कर, यदि कोई हो) अनुसूचित दवाओं के मामले में घटा सोलह प्रतिशत"
- "उप-पैराग्राफ (1) में निहित कुछ भी होने के बावजूद, सरकार एक सामान्य या विशेष आदेश द्वारा, सार्वजनिक हित में, किसी भी फॉर्मूलेशन के संबंध में थोक विक्रेता या खुदरा विक्रेता को बेची गई फॉर्मूलेशन की कीमत तय कर सकती है, जिसकी कीमत तय की गई है या इस आदेश के तहत संशोधित"। गैर-अनुसूचित फॉर्मूलेशन के लिए कंपनियां मार्जिन तय करने के लिए स्वतंत्र हैं। हालांकि, उद्योग द्वारा यह सूचित किया जाता है कि कुछ विनियंत्रित योगों के संबंध में प्रचलित सामान्य व्यापार मार्जिन खुदरा विक्रेताओं के लिए 20% और थोक विक्रेताओं के लिए 10% है।
डीपीसीओ, 1995 के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के प्रावधान के अनुसार दंडनीय है। धारा के अनुसार। आवश्यक वस्तु अधिनियम के 7, डीपीसीओ के उल्लंघन के लिए जुर्माना 3 महीने का न्यूनतम कारावास है, जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है और उल्लंघनकर्ता भी जुर्माना के लिए उत्तरदायी है।
यदि कोई निर्माता उत्पाद के लिए अनुमोदित/निर्धारित मूल्य से अधिक मूल्य पर दवा बेचता है तो निर्माता आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत अभियोजन के लिए उत्तरदायी है और निर्धारित या निर्धारित मूल्य से अधिक मूल्य वसूलने के कारण उपार्जित राशि को सरकार के पास जमा करने के लिए भी उत्तरदायी है। सरकार द्वारा अधिसूचित।
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण, राज्य के एफडीए/औषधि नियंत्रक और जिले के औषधि निरीक्षक राष्ट्रीय/राज्य/जिला स्तर पर प्रवर्तन प्राधिकरण हैं।
संबंधित राज्य का क्षेत्र राज्य औषधि नियंत्रक/संयुक्त औषधि नियंत्रक/उप औषधि नियंत्रक/सहायक औषधि नियंत्रक/औषध निरीक्षक आदि। इनमें से किसी से भी शिकायत की जा सकती है।
एक दवा के मुद्रित एमआरपी से अधिक चार्ज करना ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर, 1995 के दंडात्मक प्रावधानों को आकर्षित करता है। एक दवा के गुणवत्ता पहलू ड्रग्स और कॉस्मेटिक अधिनियम, 1940 के प्रावधानों को आकर्षित करते हैं। राज्य का एफडीए/ड्रग्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन इसकी प्रवर्तन एजेंसी है। राज्य स्तर पर ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट और डीपीसीओ। इसलिए दवाओं की कीमतों और गुणवत्ता की सभी शिकायतें जिले के ड्रग इंस्पेक्टर या स्टेट ड्रग कंट्रोलर के पास दर्ज कराई जा सकती हैं। कीमतों के उल्लंघन की शिकायत सीधे एनपीपीए में भी की जा सकती है।
एक खुदरा मूल्य वह मूल्य होता है जिस पर उपभोक्ता/उपयोगकर्ता को एक फॉर्मूलेशन/दवा बेची जाती है। सूत्रीकरण के निर्माता को उत्पाद के लेबल पर ऐसी कीमत मुद्रित करने की आवश्यकता होती है। नियंत्रित योगों के मामले में खुदरा मूल्य वह मूल्य है जो औषधि (कीमत नियंत्रण) आदेश, 1995 के प्रावधानों के अनुसार निर्धारित या निर्धारित होता है।
ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट और डीपीसीओ, 1995 के तहत एक दवा के लेबल पर निम्नलिखित जानकारी मुद्रित होना आवश्यक है।
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- सूत्रीकरण का नाम
- सूत्रीकरण की संरचना
- पैक का आकार
- निर्माता का पता
- विनिर्माण लाइसेंस संख्या
- उत्पादन की तारीख
- समाप्ति तिथि
- अधिकतम खुदरा मूल्य (स्थानीय करों को छोड़कर) आदि।
इनमें आम तौर पर बिक्री कर और चुंगी शामिल होते हैं। जब भी विनिर्माता केंद्रीय बिक्री कर (सीएसटी) का भुगतान करता है तो वह भी इसमें शामिल होता है। उन्हें ग्राहक द्वारा भुगतान किया जाना है।
मुद्रित एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) प्लस स्थानीय कर अधिकतम देय राशि है। हालांकि, इससे कम कीमत पर दवा बेची जा सकती है।
यदि कोई खुदरा विक्रेता खुली मात्रा में (बिना पैक के) बिक्री करता है, तो ऐसी दवा की कीमत कंटेनर के लेबल पर छपी कीमत के यथानुपात राशि और उसके 5% से अधिक नहीं होनी चाहिए।
हाँ। प्रत्येक खुदरा विक्रेता को मूल्य सूची और निर्माता / आयातक द्वारा प्रस्तुत पूरक मूल्य सूची परिसर के एक विशिष्ट भाग पर प्रदर्शित करने की आवश्यकता होती है, जहां वह व्यवसाय करता है ताकि किसी भी व्यक्ति के लिए आसानी से सुलभ हो सके
हाँ। प्रत्येक केमिस्ट/खुदरा विक्रेता को दवाओं की बिक्री के लिए रसीद जारी करना और कैश/क्रेडिट मेमो की प्रतियां बनाए रखना आवश्यक है।
दवाओं की कीमतों में वृद्धि के कारण हैं:
- थोक दवाओं की कीमत में वृद्धि;
- लैक्टोज, स्टार्च, चीनी, ग्लिसरीन, सॉल्वेंट, जिलेटिन कैप्सूल आदि जैसी दवाओं के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले तत्वों की लागत में वृद्धि;
- परिवहन की लागत, माल ढुलाई की दरों में वृद्धि;
- उपयोगिताओं जैसे ईंधन, बिजली, डीजल, आदि की लागत में वृद्धि;
- आयातित दवाओं के लिए, सीआईएफ मूल्य में वृद्धि और रुपये का मूल्यह्रास;
- करों और कर्तव्यों में परिवर्तन।
बल्क ड्रग कीमतों के निर्धारण/संशोधन की कार्यप्रणाली निम्नानुसार है: डीपीसीओ, 1995 के पैरा 3 के अनुसार, एनपीपीए द्वारा बल्क ड्रग की कीमतें विभिन्न निर्माताओं से उचित मूल्य पर उपलब्ध कराने के लिए निर्धारित की जाती हैं। ये कीमतें समय-समय पर आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा तय की जाती हैं। बल्क ड्रग कीमतों के निर्धारण/संशोधन में निम्नलिखित कदम शामिल हैं:-
- कंपनियों को प्रश्नावली/डीपीसीओ, 1995 का फॉर्म I जारी करके और लागत-लेखा परीक्षा रिपोर्ट आदि से डेटा का संग्रह।
- आवश्यकता पड़ने पर संयंत्र के दौरे द्वारा डेटा का सत्यापन।
- वास्तविक लागत विवरण तैयार करना।
- बल्क ड्रग के उचित मूल्य की गणना के लिए अपनाए जाने वाले तकनीकी पैरामीटर तैयार करना।
- वास्तविक लागत और तकनीकी मापदंडों के आधार पर अनुमानित लागत तैयार करना। उचित मूल्य की गणना डीपीसीओ, 1995 के उप पैरा (2), पैरा 3 में निर्दिष्ट रिटर्न प्रदान करके की जाती है, जैसा कि व्यक्तिगत निर्माता द्वारा चुना गया है।
- भारित औसत लागत, अध्ययन किए गए उत्पादन के तीसरे कट-ऑफ स्तर पर विचार करके थोक दवा के उचित मूल्य का निर्धारण।
- आधिकारिक राजपत्र में थोक दवा मूल्य की अधिसूचना।
- प्रमुख कच्चे माल और उपयोगिता दरों में बदलाव के लिए वृद्धि सूत्र के आधार पर, निर्माताओं द्वारा मांगे जाने पर उचित कीमतों को और संशोधित किया जा सकता है।
डीपीसीओ, 1995 का पैरा 8 सूत्रीकरणों की कीमतों को तय करने के लिए नियम और प्रक्रिया निर्धारित करता है। डीपीसीओ का पैरा 7 सूत्रीकरण के खुदरा मूल्य की गणना के लिए सूत्र निर्धारित करता है। वे परिस्थितियाँ जो सूत्रीकरण के मूल्य निर्धारण को वारंट करती हैं: -
- थोक दवाओं की कीमतों में संशोधन (डीपीसीओ, 1995 के पैरा 8 के उप-पैरा (2))
- नए पैक की शुरूआत (पैरा 8 का उप-पैरा (6))
- पैरा 7 के तहत सरकार द्वारा अधिसूचित विभिन्न मानदंडों आदि में परिवर्तन।
- अन्य कारण जो निर्माता द्वारा उद्धृत किए जा सकते हैं।
- मूल्य अनुमोदन प्राप्त करने के लिए, पैक का निर्माण करने वाली फर्म को डीपीसीओ में संलग्न फॉर्म-III में एक आवेदन करना होगा, यदि यह स्थानीय रूप से निर्मित है; या फॉर्म- IV, डीपीसीओ, 1995 से जुड़ा हुआ है, अगर यह आयात किया जाता है।
- स्वदेशी फार्मूलेशन के लिए फॉर्म III में निर्माताओं से एनपीपीए में प्राप्त आवेदन और फॉर्म IV में आयातकों से (डीपीसीओ, 1995 के तहत निर्धारित) मूल्य निर्धारण / संशोधन के लिए विचार किया जाता है। डीपीसीओ, 1995 के पैरा 7 में दिए गए फॉर्मूले के अनुसार स्वदेशी रूप से उत्पादित फॉर्मूलेशन की खुदरा कीमतों की गणना की जाती है। स्वदेशी रूप से निर्मित फॉर्मूलेशन के लिए, अधिकतम स्वीकार्य पोस्ट-मैन्युफैक्चरिंग एक्सपेंस (एमएपीई) 100% तक की अनुमति है। आयातित फॉर्मूलेशन के लिए एमएपीई लैंडेड लागत का 50% तक है।
जहां यह महसूस किया जाता है कि निर्माता डीपीसीओ, 1995 के प्रावधानों के अनुसार थोक दवा कीमतों और वैधानिक शुल्कों में कमी के बाद अपने आवेदन दाखिल नहीं कर रहे हैं, वहां एनपीपीए बल्क ड्रग्स और फॉर्मूलेशन दोनों की कीमतों को स्वत: आधार पर तय/संशोधित करता है। आदि। इसलिए, उपभोक्ताओं को इस तरह की कमी के लाभों को पारित करने की दृष्टि से, स्व-प्रेरणा से कीमत तय की जाती है। उदाहरण के लिए, डीपीसीओ, 1995 के पैरा 8(2) के अनुसार, विनिर्माताओं को मूल्य निर्धारण/बल्क ड्रग (दवाओं) के संशोधन के तीस दिनों की अवधि के भीतर फॉर्मूलेशन के मूल्य संशोधन के लिए आवेदन करना होता है। यदि वे निर्धारित समय के दौरान इसका अनुपालन करने में विफल रहते हैं, तो अधिकतम कीमतों के लिए डीपीसीओ, 1995 के पैरा 9(2) के अनुसार और गैर के लिए डीपीसीओ, 1995 के पैरा 8(2) और पैरा 11 के अनुसार स्वत: कार्रवाई की जाती है। -सीलिंग पैक.
एनपीपीए ने 27.01.98 को यथानुपात मूल्य निर्धारण पर अधिसूचना जारी की है। इस अधिसूचना के अनुसार, डीपीसीओ, 1995 के पैरा 9 के उप-पैराग्राफ (1) और (2) के तहत अधिसूचित पैक आकार से भिन्न सभी अनुसूचित फॉर्मूलेशन पैक आकार के निर्माताओं को ऐसे के लिए मूल्य निर्धारित करना होगा। पैरा 9 के उप-पैराग्राफ (1) और (2) के तहत इस तरह के फॉर्मूलेशन के लिए निर्धारित नवीनतम सीलिंग प्राइस के प्रो-राटा के आधार पर अलग-अलग स्ट्रिप्स या ब्लिस्टर में पैक की गई समान शक्ति या संरचना के टैबलेट और कैप्सूल के आकार के पैक डीपीसीओ, 1995। यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया था: -
- निर्माताओं को विभिन्न पैक आकारों के लिए मूल्य अनुमोदन के लिए बार-बार संपर्क करने के लिए मजबूर नहीं किया जाता है।
- मूल्य नियंत्रण से बाहर रहने के लिए निर्माता पैक के आकार में बदलाव नहीं करते हैं।
डीपीसीओ की अनुसूची 1 के तहत शामिल बल्क ड्रग के प्रत्येक फॉर्मूलेशन, पैक आकार, शक्ति, खुराक के रूप पर ध्यान दिए बिना, जहां भी आवश्यक हो, यथानुपात मूल्य के समायोजन के साथ सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य पर ही विपणन किया जाना चाहिए। हालांकि, लघु उद्योग (एसएसआई) श्रेणी के निर्माता अनुसूचित फॉर्मूलेशन के संबंध में एनपीपीए से मूल्य निर्धारण की मांग करने से छूट का लाभ उठा सकते हैं, बशर्ते कि उन्होंने एनपीपीए को SONo.134(E) दिनांक 2 के अनुसार एक घोषणा प्रस्तुत की हो। मार्च, 1995 और एनपीपीए से उसी के लिए अनुमोदन प्राप्त किया।